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Sunday, January 11, 2026
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    क्या शिवरात्रि पर भांग पीना धार्मिक है या अधर्म?

    क्या शिवरात्रि पर भांग पीना धार्मिक है या अधर्म?

    क्या शिवरात्रि पर भांग पीना धार्मिक है? जानिए वेद, पुराण, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के प्रमाणों के साथ सत्य। शास्त्रीय संदर्भ और सांस्कृतिक महत्व की सम्पूर्ण जानकारी।
    सनातन धर्म के 16 संस्कार: जन्म से मृत्यु तक जीवन की पवित्र यात्रा

    सनातन धर्म के 16 संस्कार: जन्म से मृत्यु तक जीवन की पवित्र यात्रा

    सनातन धर्म के 16 संस्कार जन्म से मृत्यु तक मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाते हैं। वेद, उपनिषद, आयुर्वेद और वैज्ञानिक शोध के आधार पर सम्पूर्ण जानकारी।
    आरती का रहस्य: पूजा के बाद आरती क्यों की जाती है ?

    आरती का रहस्य: पूजा के बाद आरती क्यों की जाती है ?

    भारतीय सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ का एक विशेष स्थान है, और आरती इसका एक अनिवार्य अंग मानी जाती है। आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ईश्वर की उपासना का एक गहरा प्रतीक है। यह न केवल हमारे भक्तिभाव को प्रकट करती है, बल्कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भी अभिव्यक्ति होती है। आइए समझते हैं कि पूजा के बाद आरती करने का क्या महत्व है।
    श्राद्ध पक्ष

    श्राद्ध पक्ष : कैसे करें पूर्वजों को तृप्त और पितृ दोष से पाएं मुक्ति

    सनातन धर्म में पितरों को विशेष महत्व दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार बिना पितरों की कृपा के व्यक्ति का उद्धार संभव नहीं है। पितरों को प्रसन्न करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में उनके श्राद्ध व तर्पण करने की परंपरा है। 16 दिन तक चलने वाले श्राद्ध पक्ष का समापन पितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।
    हलाल प्रॉडक्ट

    हलाल प्रॉडक्ट : कहीं जानें-अनजानें में आप तो नहीं खा रहें है हलाल प्रॉडक्ट...

    हलाल प्रॉडक्ट : अब वो दवाईयों से लेकर सौंदर्य उत्पाद जैसे शैम्पू, और लिपस्टिक,अस्पतालों से लेकर फाइव स्टार होटल तक , रियल एस्टेट से लेकर हलाल टूरिज्म और तो और हलाल डेटिंग, यहाँ तक की शाकाहारी प्रॉडक्ट बेसन, आटा, मैदा जैसे शाकाहारी उत्पादों तक के हलाल सर्टिफिकेशन पर पहुँच गई है। हद तो तब हो गई जब आयुर्वेदिक औषधियों तक के लिए भी हलाल सर्टिफिकेट !
    भारत में हिंदू मंदिरों पर ही सरकारी नियंत्रण

    भारत में हिंदू मंदिरों पर ही सरकारी नियंत्रण असंवैधानिक एवं अन्यायपूर्ण

    भारत में हिंदू मंदिर और उनकी संपत्ति और संपदा सरकार द्वारा नियंत्रित हैं। यह मुख्य रूप से उन प्रमुख/प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों पर लागू होता है, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और/या जो प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं और इस प्रकार हिंदू भक्तों के दान के माध्यम से बहुत अधिक धन अर्जित करते हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि किसी अन्य धर्म के धार्मिक स्थल/स्थल सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं होते हैं। भारत में हिंदू मंदिरों पर ही सरकारी नियंत्रण है, यह पक्षपातपूर्ण कठोर प्रथा केवल हिंदू मंदिरों पर लागू होती है, किसी अन्य धर्म के धार्मिक स्थलों पर नहीं।

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