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Saturday, January 10, 2026
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    वैदिक विज्ञान

    वैदिक विज्ञान प्राचीन भारत की उन वैज्ञानिक अवधारणाओं, खोजों और तकनीकी ज्ञान का संकलन है जो वेदों, उपनिषदों, आयुर्वेद, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, योग, ध्वनि विज्ञान और खगोलशास्त्र जैसे ग्रंथों में वर्णित हैं। इस श्रेणी में हम उन गूढ़ लेकिन वैज्ञानिक पहलुओं की चर्चा करते हैं जो आधुनिक विज्ञान के साथ तुलनीय हैं और जिनका उपयोग आज भी स्वास्थ्य, जीवनशैली और आध्यात्मिक विकास में किया जा रहा है। जानिए कैसे हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले ही ब्रह्मांड, शरीर, ऊर्जा और चेतना के रहस्यों को समझा और उसे मानवता के कल्याण के लिए प्रस्तुत किया।

    Agnihotra to Nanotechnology: प्राचीन भारत के विज्ञान से आधुनिक दुनिया भी चमत्कृत !

    Agnihotra to Nanotechnology: प्राचीन भारत के विज्ञान से आधुनिक दुनिया भी चमत्कृत !

    जानें कैसे प्राचीन भारत के अग्निहोत्र और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे विज्ञान आज के शोधकर्ताओं को हैरान कर रहे हैं। आयुर्वेदिक भस्म और वैदिक तकनीकों का आधुनिक विज्ञान से क्या संबंध है?
    वेदों में छिपे हैं ब्लैक होल (Black hole) के रहस्य? ऋषियों का अद्भुत ज्ञान!

    वेदों में छिपे हैं ब्लैक होल (Black hole) के रहस्य? ऋषियों का अद्भुत ज्ञान!

    वेद और Black hole: ऋषियों ने हज़ारों साल पहले जान लिया था ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य! - क्या वैदिक ऋषियों को ब्लैक होल के बारे में पता था? नासदीय सूक्त, शिव पुराण और भगवद्गीता में छिपे ब्रह्मांड के रहस्यों को आधुनिक विज्ञान कैसे सिद्ध कर रहा है? जानें वेदों के अद्भुत वैज्ञानिक दृष्टिकोण को।
    वैदिक ऋषियों (Vedic Science) का अद्भुत वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    नासदीय सूक्त से क्वांटम फिज़िक्स तक: वैदिक ऋषियों (Vedic Science) का अद्भुत वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    वैदिक ऋषियों का ज्ञान आज के क्वांटम फिज़िक्स, ब्रह्मांड विज्ञान और चेतना के सिद्धांतों से कैसे मेल खाता है? नासदीय सूक्त में छिपे ब्रह्मांड के रहस्यों से लेकर ऋषियों की अंतर्दृष्टि तक, यह लेख खोज करता है कि कैसे प्राचीन भारत का विज्ञान आधुनिक खोजों से आगे था।
    शनि की साढ़े साती और ढैय्या: अनहोनी से पहले कर ले ये उपाय, दूर होंगे सभी कष्ट

    शनि की साढ़े साती और ढैय्या: अनहोनी से पहले कर ले ये उपाय, दूर...

    ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। शनि की साढ़े साती और ढैय्या का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दौरान व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
    सनातन धर्म में विज्ञान: प्राचीन ग्रंथों में छिपे वैज्ञानिक तथ्य

    सनातन धर्म में विज्ञान: प्राचीन ग्रंथों में छिपे वैज्ञानिक तथ्य

    सनातन धर्म, विश्व के सबसे प्राचीन और समृद्ध धर्मों में से एक है। यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संपूर्ण दर्शन है। इसकी जड़ें हज़ारों साल पुरानी हैं, और इसके ग्रंथों में न केवल आध्यात्मिक ज्ञान, बल्कि वैज्ञानिक सिद्धांतों का भी विस्तृत वर्णन मिलता है। आज के आधुनिक विज्ञान के सभी सिद्धांत सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में पहले से ही मौजूद हैं। आइए जानते है विज्ञान का जनक सनातन धर्म ही है।
    Kaal Sarp Dosh: कुंडली में 'कालसर्प दोष' तो घबराएं नहीं,

    Kaal Sarp Dosh: कुंडली में ‘कालसर्प दोष’ तो घबराएं नहीं, निवारण के आसान उपाय

    Kaal Sarp Dosh: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं तो कालसर्प दोष कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र में काल सर्प दोष को अशुभ माना गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है तो व्यक्ति को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुंडली में काल सर्प दोष होने से व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होता है।
    घर में सही दिशा में लगाएँ हनुमान जी की तस्वीर

    Vastu Tips : घर में सही दिशा में लगाएँ हनुमान जी की तस्वीर

    सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का अपना महत्व है। वास्तु शास्त्र में घर में देवी-देवताओं की तस्वीर लगाने के बारे में बताया गया है। मान्यता है कि घर में सही जगह पर हनुमान जी की तस्वीर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और परिवार के सस्दयों पर बजरंगबली की कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि घर की किस स्थान पर हनुमान जी की तस्वीर लगानी चाहिए ?
    गुरु और केतु का नवपंचम योग

    गुरु और केतु का नवपंचम योग, इन राशियों का भाग्य देगा साथ, मिलेगी अपार...

    गुरु-केतु की युति से गुरु और केतु का नवपंचम योग का निर्माण होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में नवपंचम योग बहुत ही शुभ माना जाता है। कहते हैं कि जिनकी राशि में नवपंचम योग बनता है, उनकी किस्मत चमक जाती है। साथ ही व्यापार और करियर में तरक्की मिलती है।
    धनु राशि में बनेगा बुध और शुक्र का संंयोग

    धनु राशि में बनेगा बुध और शुक्र का संंयोग, मेष , धनु और कुम्भ...

    Mercury And Venus Conjunction In 2024 : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का समय- समय पर अपने मित्र और शत्रु ग्रह के साथ संयोग बनता है । जिसका प्रभाव मावन जीवन और प्राणी मात्र पर देखने को मिलता है। ज्योतिषशास्त्र में बुध ग्रह को वाणी , बुद्धि , सौन्दर्य , व्यापार , एकाग्रता और त्वचा का कारक माना गया है , वही शुक्र ग्रह को धन , सुख , संपत्ति , ,वैभव और ऐश्वर्य का कारक ग्रह माना गया है ।ज्योतिषशास्त्र के अनुसार 7 जनवरी को ग्रहों के राजकुमार बुध धनु ऱाशि में प्रवेश करेंगे और वहीं 18 जनवरी को धन के दाता शुक्र ग्रह धनु राशि में संचरण करेंगे। मेष , धनु और कुम्भ राशियों की चमकेगी किस्मत , जिनको इस समय आकस्मिक धनलाभ और करियर में तरक्की के योग बन रहे हैं।
    विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता

    विक्रम संवत् की प्रमाणिकता एवं सटीक गणना विज्ञान से भी आगे

    चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के नाम से हमारा राष्ट्रीय सम्वत विक्रम संवत् कहलाता है। विक्रमादित्य द्वारा प्रवर्तित विक्रम संवत् न केवल वैज्ञानिक है बल्कि हमारे सभी धार्मिक अनुष्ठान, तीज त्यौहार भी इसी के अनुसार मनाए जाते हैं। सूर्यग्रहण एवम् चंद्रग्रहण की प्रामाणिक जानकारी भी........

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