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Saturday, January 10, 2026
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    Home वैदिक विज्ञान ज्योतिष & वास्तु

    ज्योतिष & वास्तु

    प्राचीन भारत में वैदिक काल से ग्रह, नक्षत्रों और खगोलीय पिंडों का अध्ययन करने के विषय को ज्योतिष कहते हैं ।

    ज्योतिष शास्त्र में ग्रह, नक्षत्रों की सटीक गणना और उसका जीवन एवम् सृष्टि पर प्रभाव का अध्ययन किया जाता हैं । इसमें गणित ज्योतिष (theoretical astronomy) , वेदांग ज्योतिष , फलित ज्योतिष , अंक ज्योतिष (numerology) , खगोल शास्त्र (astronomy) , प्रमुख हैं ।

    वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है। यह विद्या भारत की प्राचीन विद्याओं में से एक है। यह अथर्ववेद का अंग है। वास्तु शास्त्र का सम्बन्ध दिशाओं और ऊर्जा से है, इसमें दिशाओं को आधार बनाकर भूखण्ड, भवन, मन्दिर या निर्माण के आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक (positive) किया जाता हैं। ताकि मानव जीवन पर अपना प्रतिकूल प्रभाव ना डाल सके और सकारात्मक प्रभाव पड़े।

    इस सृष्टि के साथ मानव जीवन भी पञ्च महाभुत पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है और यही तत्व जीवन और सृष्टि को प्रभावित करते हैं।

    वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) : अद्भुत विज्ञान और रहस्य

    वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के वैज्ञानिक रहस्य और मानव जीवन पर प्रभाव

    वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विज्ञान है। यह विद्या भारत की प्राचीन विद्याओं में से एक है। वास्तु शास्त्र अथर्ववेद का अंग है। इसमें किसी निर्माण की या सरंचना की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक किया जाता हैं।
    विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता

    विक्रम संवत् की प्रमाणिकता एवं सटीक गणना विज्ञान से भी आगे

    चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के नाम से हमारा राष्ट्रीय सम्वत विक्रम संवत् कहलाता है। विक्रमादित्य द्वारा प्रवर्तित विक्रम संवत् न केवल वैज्ञानिक है बल्कि हमारे सभी धार्मिक अनुष्ठान, तीज त्यौहार भी इसी के अनुसार मनाए जाते हैं। सूर्यग्रहण एवम् चंद्रग्रहण की प्रामाणिक जानकारी भी........
    Surya Aadra Nakshatra Entry 2025: कब शुरू होगी झमाझम बारिश ? ज्योतिष और मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी

    Surya Aadra Nakshatra Entry 2025: कब शुरू होगी झमाझम बारिश ? ज्योतिष और मौसम...

    जानते हैं कि 2025 में मानसून कैसा रहेगा, स्त्री-नपुंसक योग का क्या असर होगा, और कब तक होगी भारी बारिश।
    शनि की साढ़े साती और ढैय्या: अनहोनी से पहले कर ले ये उपाय, दूर होंगे सभी कष्ट

    शनि की साढ़े साती और ढैय्या: अनहोनी से पहले कर ले ये उपाय, दूर...

    ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। शनि की साढ़े साती और ढैय्या का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दौरान व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
    हिन्दू पंचांग और वैदिक कालगणना: तिथि, नक्षत्र, योग, करण का वैज्ञानिक पक्ष

    हिन्दू पंचांग और वैदिक कालगणना: तिथि, नक्षत्र, योग, करण का वैज्ञानिक पक्ष

    जानिए हिन्दू पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार, वैदिक कालगणना के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य। वेदों, आयुर्वेद, पुरातत्वीय प्रमाणों और आधुनिक शोध सहित विश्लेषण।
    घर में सही दिशा में लगाएँ हनुमान जी की तस्वीर

    Vastu Tips : घर में सही दिशा में लगाएँ हनुमान जी की तस्वीर

    सनातन धर्म में वास्तु शास्त्र का अपना महत्व है। वास्तु शास्त्र में घर में देवी-देवताओं की तस्वीर लगाने के बारे में बताया गया है। मान्यता है कि घर में सही जगह पर हनुमान जी की तस्वीर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और परिवार के सस्दयों पर बजरंगबली की कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि घर की किस स्थान पर हनुमान जी की तस्वीर लगानी चाहिए ?
    बार-बार असफलता, बीमारी और कलह ? कहीं पितृ दोष (Pitru Dosha) तो नहीं सता रहा !

    बार-बार असफलता, बीमारी और कलह ? कहीं पितृ दोष (Pitru Dosha) तो नहीं...

    जानें कैसे पहचानें पितृ दोष (Pitra Dosh) के संकेत? असफलता, बीमारी और कलह से मुक्ति के लिए वैज्ञानिक और आध्यात्मिक उपाय।
    Kaal Sarp Dosh: कुंडली में 'कालसर्प दोष' तो घबराएं नहीं,

    Kaal Sarp Dosh: कुंडली में ‘कालसर्प दोष’ तो घबराएं नहीं, निवारण के आसान उपाय

    Kaal Sarp Dosh: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं तो कालसर्प दोष कहलाता है। ज्योतिष शास्त्र में काल सर्प दोष को अशुभ माना गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है तो व्यक्ति को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुंडली में काल सर्प दोष होने से व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित होता है।
    ग्रहण (सूर्य एवं चंद्र): वैज्ञानिक कारण, ज्योतिषीय प्रभाव एवं धार्मिक नियम | ग्रहण में क्या करें और क्या न करें ?

    ग्रहण (सूर्य एवं चंद्र): वैज्ञानिक कारण, ज्योतिषीय प्रभाव एवं धार्मिक नियम | ग्रहण में...

    जानिए 2025 में कब-कब होंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण, उनका धार्मिक महत्व, सूतक काल, राशियों पर प्रभाव और वैज्ञानिक तथ्य सरल हिंदी में।
    धनु राशि में बनेगा बुध और शुक्र का संंयोग

    धनु राशि में बनेगा बुध और शुक्र का संंयोग, मेष , धनु और कुम्भ...

    Mercury And Venus Conjunction In 2024 : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का समय- समय पर अपने मित्र और शत्रु ग्रह के साथ संयोग बनता है । जिसका प्रभाव मावन जीवन और प्राणी मात्र पर देखने को मिलता है। ज्योतिषशास्त्र में बुध ग्रह को वाणी , बुद्धि , सौन्दर्य , व्यापार , एकाग्रता और त्वचा का कारक माना गया है , वही शुक्र ग्रह को धन , सुख , संपत्ति , ,वैभव और ऐश्वर्य का कारक ग्रह माना गया है ।ज्योतिषशास्त्र के अनुसार 7 जनवरी को ग्रहों के राजकुमार बुध धनु ऱाशि में प्रवेश करेंगे और वहीं 18 जनवरी को धन के दाता शुक्र ग्रह धनु राशि में संचरण करेंगे। मेष , धनु और कुम्भ राशियों की चमकेगी किस्मत , जिनको इस समय आकस्मिक धनलाभ और करियर में तरक्की के योग बन रहे हैं।

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