भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व (festival) केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन के गहरे दार्शनिक सत्य का प्रकटीकरण (manifestation) है। मकर संक्रांति 2026 का पावन पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा, जब सूर्य देव दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करेंगे। यह वह शुभ घड़ी है जब प्रकृति स्वयं अपना स्वरूप बदलती है और मानव जीवन में नई ऊर्जा का संचार (infusion) होता है।
2026 में बन रहे दुर्लभ योग (Rare Astrological Yogas)
1. षट्तिला एकादशी और मकर संक्रांति का अद्भुत मिलन
ज्योतिष शास्त्र (astrology) में यह अत्यंत विरल घटना है जब मकर संक्रांति के दिन षट्तिला एकादशी (Shattila Ekadashi) का व्रत भी पड़ता है। यह संयोग 23 वर्षों के पश्चात बन रहा है। पद्म पुराण में इस योग को ‘महापुण्यकारी’ बताया गया है। इस दिन तिल का षड्विध प्रयोग (six-fold use of sesame) करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
वैज्ञानिक महत्व: एकादशी के दिन व्रत रखने से पाचन तंत्र (digestive system) को विश्राम मिलता है और शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन (detoxification) होता है। आधुनिक शोध इंटरमिटेंट फास्टिंग (intermittent fasting) के लाभों की पुष्टि करते हैं।
2. अनुराधा नक्षत्र में संक्रांति (Sankranti in Anuradha Nakshatra)
इस वर्ष मकर संक्रांति अनुराधा नक्षत्र में पड़ रही है, जो मित्रता, सफलता और समृद्धि का प्रतीक है। वैदिक ज्योतिष में अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि (Saturn) है और इसका अधिष्ठाता देवता मित्र हैं। जब सूर्य इस नक्षत्र में मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो यह ‘मंदाकिनी संक्रांति’ कहलाती है।
ज्योतिषीय प्रभाव: मंदाकिनी संक्रांति का अर्थ है अच्छी वर्षा ऋतु (rainfall season), फसलों की उत्तम पैदावार और जनसामान्य के लिए सुख-समृद्धि। जातक पारिजात में लिखा है:
“अनुराधायां संक्रांतौ सुवृष्टिः सस्यसंपदः।”
3. सर्वार्थसिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग (Sarvartha Siddhi & Amrit Siddhi Yoga)
14 जनवरी को दो अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है:
सर्वार्थसिद्धि योग: सुबह 7:15 बजे से प्रारंभ होकर पूरे दिन रहेगा। इस योग में किए गए कार्य सफल होते हैं और सभी मनोकामनाएं (desires) पूर्ण होती हैं।
अमृत सिद्धि योग: यह योग अमृत के समान फलदायी है। इस समय किया गया दान, पूजा और जप विशेष फलदायक होते हैं। ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है:
“अमृतसिद्धौ कृतं कर्म कोटिगुणफलप्रदम्।”
4. पंचग्रही राजयोग (Panchgrahi Rajyoga – Rare Stellium)
मकर संक्रांति 2026 की सबसे असाधारण विशेषता यह है कि इस समय मकर राशि में पांच ग्रहों का दुर्लभ मिलन (planetary conjunction) हो रहा है। सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल और शनि – ये पांच ग्रह एक साथ मकर राशि में स्थित होंगे। पाराशर होरा शास्त्र में इसे ‘पंचग्रही राजयोग’ कहा गया है।
योग का प्रभाव: यह योग विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण परिवर्तन (global transformations) का संकेत है। राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना में बड़े बदलाव संभव हैं। व्यक्तिगत जीवन में कैरियर, संबंध और आध्यात्मिक विकास में तीव्र प्रगति होगी।
5. बुधवार और बलव करण का संयोग
संक्रांति बुधवार के दिन हो रही है और करण ‘बलव’ है। बुध ग्रह (Mercury) बुद्धि और संचार का कारक है। मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार:
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)
उत्तरायण: देवों का दिवस (The Divine Northward Journey)
भारतीय ज्योतिष (astrology) के अनुसार, वर्ष को दो भागों में विभाजित किया गया है: उत्तरायण और दक्षिणायन। महाभारत में भीष्म पितामह ने अपनी इच्छा मृत्यु (self-willed death) के लिए उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी। भगवद्गीता के आठवें अध्याय में श्रीकृष्ण कहते हैं:
“अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम्। तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः॥”
अर्थात्, जो योगी (ascetic) उत्तरायण के छह महीनों में शरीर त्यागते हैं, वे ब्रह्म को प्राप्त करते हैं। यह काल देवताओं का दिन माना जाता है, जब सूर्य की किरणें (rays) अधिक प्रखर और जीवनदायिनी होती हैं।
वैदिक साक्ष्य (Vedic Evidence)
ऋग्वेद में सूर्य को ‘जगत की आत्मा’ कहा गया है:
“आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्॥”
सूर्य अपने स्वर्णिम रथ में विश्व की यात्रा करते हुए सभी प्राणियों (beings) को जीवन प्रदान करते हैं। विष्णु धर्मसूत्र में तिल (sesame seeds) के छह प्रयोगों को पुण्यदायक बताया गया है: तिल से स्नान, दान, भोजन, जल में तिल मिलाकर तर्पण (oblation), होम और तिल का सेवन।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Perspective)
खगोलीय घटना (Astronomical Event)

मकर संक्रांति एक वैज्ञानिक खगोलीय घटना है। पृथ्वी अपनी धुरी (axis) पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है और सूर्य की परिक्रमा (revolution) करती है। 14 जनवरी को सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध (northern hemisphere) की ओर बढ़ना शुरू करता है, जिससे दिन लंबे होते जाते हैं। यह प्राकृतिक परिवर्तन (natural transformation) कृषि, स्वास्थ्य और मौसम को प्रभावित करता है।
स्वास्थ्य और आयुर्वेद (Health and Ayurveda)
चरक संहिता के अनुसार, उत्तरायण में सूर्य की किरणों से विटामिन डी (Vitamin D) का स्तर बढ़ता है, जो हड्डियों और प्रतिरक्षा तंत्र (immunity) के लिए आवश्यक है। तिल और गुड़ (jaggery) का सेवन शरीर को गर्मी प्रदान करता है और वात दोष (Vata dosha) को संतुलित करता है। आधुनिक शोध भी पुष्ट करते हैं कि तिल में ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सिडेंट (antioxidants) प्रचुर मात्रा में होते हैं।
कृषि और फसल का उत्सव (Agricultural Celebration)
मकर संक्रांति मूलतः फसल कटाई का पर्व (harvest festival) है। रबी की फसल तैयार होती है और किसान अपनी मेहनत के फल का आनंद लेते हैं। पंजाब में ‘लोहड़ी’, तमिलनाडु में ‘पोंगल’, असम में ‘माघ बिहू’ और गुजरात में ‘उत्तरायण’ के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। यह राष्ट्रीय एकता (national unity) का प्रतीक है जो विविधता में एकता (unity in diversity) को दर्शाता है।
मकर संक्रांति 2026: तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Date and Auspicious Timings)
तिथि: 14 जनवरी 2026, बुधवार
संक्रांति समय: दोपहर 3:13 बजे
पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक
महा पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से 3:37 बजे तक
नक्षत्र: अनुराधा नक्षत्र में यह शुभ योग (auspicious conjunction) बन रहा है
पूजा विधि एवं अनुष्ठान (Worship Rituals)
प्रातःकालीन अनुष्ठान (Morning Rituals)
सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी या घर पर स्नान करें। जल में तिल मिलाकर स्नान करने से पापों का नाश होता है। स्नान के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य (water offering) दें और निम्न मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा।”
गायत्री मंत्र का जाप करें:
“ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥”
दान का महत्व (Significance of Charity)
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। तिल, गुड़, कंबल (blanket), ऊनी वस्त्र (woolen clothes), अनाज और गाय का दान शुभ माना जाता है। विष्णु पुराण में कहा गया है:
“माघे मासे महादेवः यो दास्यति घृतकम्बलम्। स भुक्त्वा सकलान्भोगान् अन्ते मोक्षं प्राप्नुयात्॥”
माघ मास में कंबल का दान करने वाला व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष (liberation) प्राप्त करता है।
पतंग उड़ाने की परंपरा (Kite Flying Tradition)
गुजरात और राजस्थान में पतंग उड़ाना (kite flying) इस पर्व का अभिन्न अंग है। यह परंपरा न केवल मनोरंजन है, बल्कि प्रातःकाल की सूर्य किरणों से विटामिन डी प्राप्त करने का वैज्ञानिक तरीका भी है। आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें मानव आकांक्षाओं (aspirations) और उड़ान का प्रतीक हैं।
खिचड़ी का महत्व (Significance of Khichdi)
उत्तर भारत में इसे ‘खिचड़ी पर्व’ भी कहते हैं। चावल और मूंग दाल की खिचड़ी सात्विक भोजन (Sattvic food) है जो पाचन तंत्र (digestive system) को मजबूत करती है। आयुर्वेद में इसे त्रिदोष नाशक (balancing three doshas) माना गया है।
लोक परंपराएं और क्षेत्रीय विविधता (Folk Traditions and Regional Diversity)
पंजाब: लोहड़ी की अग्नि में तिल, गुड़, मूंगफली डालकर अग्नि देव की पूजा
तमिलनाडु: पोंगल में नई फसल से व्यंजन बनाकर सूर्य को अर्पण
असम: माघ बिहू में पारंपरिक नृत्य और भोज
महाराष्ट्र: तिल-गुड़ के लड्डू बांटकर मधुर वचन बोलने की परंपरा
आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिकता (Modern Relevance)
आज के भौतिकवादी युग (materialistic era) में मकर संक्रांति प्रकृति से जुड़ने का अवसर है। यह पर्व सिखाता है कि जीवन में परिवर्तन (change) स्थायी है और हमें अंधकार के बाद प्रकाश की आशा रखनी चाहिए। सामाजिक समरसता (social harmony), दान की भावना और आध्यात्मिक जागरण (spiritual awakening) इस पर्व के मूल संदेश हैं।
FAQs: आपके प्रश्न
प्रश्न 1: मकर संक्रांति 2026 कब है?
उत्तर: मकर संक्रांति 2026 में 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3:13 बजे होगा।
प्रश्न 2: मकर संक्रांति पर किसकी पूजा करनी चाहिए?
उत्तर: मकर संक्रांति पर मुख्य रूप से सूर्य देव की पूजा की जाती है। साथ ही गंगा स्नान और तिल-गुड़ का दान करना शुभ माना जाता है।
प्रश्न 3: तिल और गुड़ क्यों खाते हैं?
उत्तर: तिल और गुड़ शरीर को गर्मी प्रदान करते हैं और सर्दियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। आयुर्वेद में इन्हें वात नाशक माना गया है।
प्रश्न 4: उत्तरायण का क्या अर्थ है?
उत्तर: उत्तरायण का अर्थ है सूर्य का उत्तर दिशा की ओर बढ़ना। इस काल को देवताओं का दिन और अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रश्न 5: मकर संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए?
उत्तर: तिल, गुड़, कंबल, ऊनी वस्त्र, अनाज, गाय का दान और गरीबों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।
प्रश्न 6: 2026 में मकर संक्रांति में कौन से दुर्लभ योग बन रहे हैं?
उत्तर: 2026 में 23 वर्षों बाद षट्तिला एकादशी और मकर संक्रांति एक साथ हैं। साथ ही अनुराधा नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और पांच ग्रहों का मकर राशि में पंचग्रही राजयोग बन रहा है।
प्रश्न 7: पंचग्रही राजयोग क्या है?
उत्तर: जब पांच ग्रह एक साथ एक राशि में हों तो पंचग्रही राजयोग बनता है। 2026 में सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल और शनि मकर राशि में होंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
मकर संक्रांति 2026 केवल एक तिथि नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता (positivity) का संचार है। जब सूर्य उत्तर दिशा में बढ़ता है, तो वह हमें भी जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान दोनों इस पर्व की महत्ता को स्वीकार करते हैं। आइए, इस पावन अवसर पर संकल्प लें कि हम प्रकाश की ओर बढ़ेंगे, अज्ञानता के अंधकार को दूर करेंगे और सामूहिक कल्याण (collective welfare) के मार्ग पर चलेंगे।
“तमसो मा ज्योतिर्गमय” – अंधकार से प्रकाश की ओर चलो।
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