20.3 C
New Delhi
Friday, January 9, 2026
More
    पुनर्जन्म (Reincarnation) के प्रमाण: क्या वैज्ञानिक शोध भी मानते हैं इसे ?

    पुनर्जन्म (Reincarnation) के प्रमाण: क्या वैज्ञानिक शोध भी मानते हैं इसे ?

    3
    पुनर्जन्म (Reincarnation): पुनर्जन्म की अवधारणा अनादि काल से सनातन धर्म और अन्य आध्यात्मिक परंपराओं का हिस्सा रही है। पुनर्जन्म अर्थात आत्मा का एक शरीर त्यागकर दूसरे शरीर में प्रवेश करना, भारतीय दर्शन और धर्म का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। लेकिन क्या विज्ञान भी पुनर्जन्म को मानता है? क्या पुनर्जन्म के कोई प्रमाण हैं? सनातन के पोस्ट में, हम पुनर्जन्म से जुड़े वैज्ञानिक शोध, रोचक तथ्य और इसकी सच्चाई को जानेंगे।
    भारत में हिंदू मंदिरों पर ही सरकारी नियंत्रण

    भारत में हिंदू मंदिरों पर ही सरकारी नियंत्रण असंवैधानिक एवं अन्यायपूर्ण

    6
    भारत में हिंदू मंदिर और उनकी संपत्ति और संपदा सरकार द्वारा नियंत्रित हैं। यह मुख्य रूप से उन प्रमुख/प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों पर लागू होता है, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और/या जो प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं और इस प्रकार हिंदू भक्तों के दान के माध्यम से बहुत अधिक धन अर्जित करते हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि किसी अन्य धर्म के धार्मिक स्थल/स्थल सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं होते हैं। भारत में हिंदू मंदिरों पर ही सरकारी नियंत्रण है, यह पक्षपातपूर्ण कठोर प्रथा केवल हिंदू मंदिरों पर लागू होती है, किसी अन्य धर्म के धार्मिक स्थलों पर नहीं।
    मृत्यु का रहस्य और शास्त्रों के अनुसार मृत्यु(Death) आने के पूर्व संकेत

    मृत्यु का रहस्य और शास्त्रों के अनुसार मृत्यु (Death) आने के पूर्व संकेत

    2
    मृत्यु सृष्टि का अटल सत्य है, जिसे कोई टाल नहीं सकता। यह केवल जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक अनिवार्य सत्य, एक यात्रा, या एक परिवर्तन के रूप में देखा जाता है। सनातन धर्म में मृत्यु (Death) को एक नए जीवन का प्रारंभ माना जाता है। इसे भयभीत होने की बजाय स्वीकार करने और आत्मिक उन्नति के लिए एक अवसर के रूप में देखा जाता है।
    Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा की वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषी व्याख्या एवं इसके अद्भुत लाभ

    Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा की वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषी व्याख्या एवं इसके अद्भुत लाभ

    1
    Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह चालीसा 40 छंदों में भगवान हनुमान की स्तुति में लिखा गया एक ऐसा भक्ति स्तोत्र है। यह केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि भगवान हनुमानजी की महिमा और उनके गुणों का गान है। इसे न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बल्कि आधुनिक विज्ञान के दृष्टिकोण से भी गहन शोध और अध्ययन से मानसिक और शारीरिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी लाभकारी माना गया है।
    आरती का रहस्य: पूजा के बाद आरती क्यों की जाती है ?

    आरती का रहस्य: पूजा के बाद आरती क्यों की जाती है ?

    0
    भारतीय सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ का एक विशेष स्थान है, और आरती इसका एक अनिवार्य अंग मानी जाती है। आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ईश्वर की उपासना का एक गहरा प्रतीक है। यह न केवल हमारे भक्तिभाव को प्रकट करती है, बल्कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भी अभिव्यक्ति होती है। आइए समझते हैं कि पूजा के बाद आरती करने का क्या महत्व है।
    सनातन धर्म में विज्ञान: प्राचीन ग्रंथों में छिपे वैज्ञानिक तथ्य

    सनातन धर्म में विज्ञान: प्राचीन ग्रंथों में छिपे वैज्ञानिक तथ्य

    5
    सनातन धर्म, विश्व के सबसे प्राचीन और समृद्ध धर्मों में से एक है। यह केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संपूर्ण दर्शन है। इसकी जड़ें हज़ारों साल पुरानी हैं, और इसके ग्रंथों में न केवल आध्यात्मिक ज्ञान, बल्कि वैज्ञानिक सिद्धांतों का भी विस्तृत वर्णन मिलता है। आज के आधुनिक विज्ञान के सभी सिद्धांत सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में पहले से ही मौजूद हैं। आइए जानते है विज्ञान का जनक सनातन धर्म ही है।
    वैदिक ऋषियों (Vedic Science) का अद्भुत वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    नासदीय सूक्त से क्वांटम फिज़िक्स तक: वैदिक ऋषियों (Vedic Science) का अद्भुत वैज्ञानिक दृष्टिकोण

    4
    वैदिक ऋषियों का ज्ञान आज के क्वांटम फिज़िक्स, ब्रह्मांड विज्ञान और चेतना के सिद्धांतों से कैसे मेल खाता है? नासदीय सूक्त में छिपे ब्रह्मांड के रहस्यों से लेकर ऋषियों की अंतर्दृष्टि तक, यह लेख खोज करता है कि कैसे प्राचीन भारत का विज्ञान आधुनिक खोजों से आगे था।

    Recent posts

    Random Posts