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Thursday, January 8, 2026
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    साधना

    साधना आत्म-साक्षात्कार की वह मार्ग है जो संयम, अनुशासन और निरंतर अभ्यास द्वारा साधक को परम सत्य की ओर ले जाता है। यह श्रेणी विविध साधनाओं जैसे मंत्र जप, तंत्र साधना, गायत्री साधना, चक्र साधना, नवदुर्गा साधना, और गुरु-दीक्षा पर आधारित गहन जानकारी प्रदान करती है। यहाँ आप जानेंगे साधना की विधि, नियम, उपवास, साधना काल, ध्यान के स्तर और दिव्य अनुभवों की प्रक्रिया को – शास्त्रों और संतों की वाणी के आलोक में। यह अनुभाग उन साधकों के लिए है जो आध्यात्मिक गहराई की खोज में हैं।

    क्यों चढ़ाया जाता है शिवलिंग पर जल ? वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण

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    शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है? जानिए इसके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य जो आपके मन, शरीर और आत्मा को प्रभावित करते हैं।
    शनि का प्रकोप कैसे शांत करें | 7 उपाय जो देंगे तुरंत राहत

    शनि का प्रकोप कैसे शांत करें | 7 उपाय जो देंगे तुरंत राहत

    शनि देव को प्रसन्न करने के 7 प्रमाणित वैदिक उपाय। पुराणों, शास्त्रों और आधुनिक विज्ञान से सिद्ध तरीके जानें। साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति का मार्ग।
    यज्ञ: न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान बल्कि एक साइंटिफिक थेरेपी

    यज्ञ: न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान बल्कि एक साइंटिफिक थेरेपी – जानिए इसके 8 अद्भुत...

    यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक साइंटिफिक थेरेपी है। वेद, उपनिषद, आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के प्रमाण सहित जानिए यज्ञ के 7 अद्भुत फायदे और इसका दिव्य ऊर्जा से संबंध।
    माँ बगुलामुखी: शत्रुनाश के लिए ब्रह्मास्त्र है

    माँ बगुलामुखी: शत्रुनाश के लिए ब्रह्मास्त्र है बगुलामुखी की साधना

    माँ बगुलामुखी: पिताम्बरा के नाम विख्यात बगलामुखी की साधना प्रायः शत्रुनाश और वाणी की सिद्धि के लिये की जाती है। माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। यह भगवती पार्वती का उग्र स्वरूप है। ये भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाली देवी है। शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है। शत्रुनाश के लिए ब्रह्मास्त्र है बगुलामुखी की साधना।
    Shree Krishna Janmashtami 2023,

    Janmashtami 2024 : दुर्लभ संयोग में कान्हा का जन्म, श्रीकृष्ण की आराधना से अक्षय...

    Janmashtami 2024 : भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को श्री कृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं । भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को पूरे देश और विदेशों में धूमधाम से मनाया जाता हैं। देश विदेश के श्री कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट एवम् भजन कीर्तन होता है। मध्यरात्रि में कान्हा (श्री कृष्ण ) का स्नान, नव परिधान, विशेष श्रृंगार होता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को देश विदेश में विशेष पर्व की तरह मनाते हैं। इस दुर्लभ संयोग में श्रीकृष्ण की आराधना से अक्षय पुण्य की प्राप्ति एवं मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
    Aaditya Hridaya Stotra

    Aaditya Hridaya Stotra: आदित्यहृदय स्तोत्र से सूर्य के समान तेज और यश की प्राप्ति

    Aaditya Hridaya Stotra : सूर्य से पूरी सृष्टि को ऊर्जा और प्रकाश प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार सनातन धर्म में सूर्य को देवता के रूप में पूजा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य सभी ग्रहों का राजा है। सूर्य को ज्योतिष शास्त्र में पिता, पुत्र, प्रसिद्धि, यश, तेज, आरोग्य, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति का कारक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति सूर्य की नियमित आराधना करता है, उसे सूर्य के समान तेज, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
    वैज्ञानिक शोधों में भी प्रमाणित मंत्रों का चमत्कार , जानें लाभ और सही विधि

    मंत्रो का चमत्कार (Miracle of Mantras)

    शास्त्रों में मंत्र के बारे में कहा गया है कि मन को तारने वाली ध्वनि ही मंत्र है जैसे - श्री, ॐ आदि शब्द होते हुए भी मंत्र है। ये बीज मंत्र है जो अपने अन्दर बहुत कुछ समेटे हुए है।
    गुप्त नवरात्रि : दस महाविद्याओं की साधना से सिद्धियों की प्राप्ति

    गुप्त नवरात्रि : दस महाविद्याओं की साधना से सिद्धियों की प्राप्ति

    प्रतिवर्ष चार नवरात्रि होती है, दो नवरात्रि - चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में होती है और दो नवरात्रि आषाढ़ और माघ महीने की शुक्ल पक्ष में होती है। आषाढ़ और माघ माह की प्रतिपदा में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि एक विशेष नवरात्रि होती है जिसमें विशेष साधना और पूजा की जाती है। यह मुख्य रूप से तंत्र साधना से जुड़ी होती है। गुप्त नवरात्री में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है।
    ऋषियों की अलौकिक शक्तियाँ: कैसे काम करती थी 'दिव्य दृष्टि'?

    ऋषियों की अलौकिक शक्तियाँ: कैसे काम करती थी ‘दिव्य दृष्टि’?

    क्या ऋषि वास्तव में भविष्य देख सकते थे? जानिए "दिव्य दृष्टि" का रहस्य, वैदिक प्रमाण, आधुनिक विज्ञान की व्याख्या और इस अलौकिक शक्ति के पीछे छिपे आध्यात्मिक सिद्धांत।
    नागा साधुओं के अखाड़े

    नागा साधुओं का रहस्य, 12 वर्ष कठोर तप एवं स्वयं का पिंडदान कर बनते...

    कुंभ मेले के शाही स्नान में आपने युद्ध कला का प्रदर्शन करते हुए स्नान को जाते नागा साधुओं की हुजूम को अवश्य देखा होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये नागा साधु कौन होते हैं, कैसे बनते हैं, कहां और किस नाम से जाने जाते हैं ? आदिगुरु शंकराचार्य की ओर से स्थापित किए गए विभिन्न अखाड़ों में रहने वाले ऐसे साधु जो नग्न रहते हैं, शरीर पर धुनि की राख लपेटकर रखते हैं, युद्ध कला में पारंगत होते हैं उन्हें नागा साधु कहा जाता है ।

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