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Sunday, January 11, 2026
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    Sharad Purnima Kheer

    Sharad Purnima Kheer: शरद पूर्णिमा की खीर का वैज्ञानिक और पौराणिक महत्व

    Sharad Purnima Kheer: शरद पूर्णिमा अश्विन माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और पौराणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। खासतौर पर, शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाने और चांदनी में रखने की परंपरा सदियों से प्रचलित है। आइए जानते हैं कि इस परंपरा का क्या पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व है।
    Shardiya (Aashwin) Navratri 2023 Shubh Muhurt

    Shardiya (Aashvin) Navaratri 2023: घट स्थापना, दुर्गाष्टमी, विजिया दशमी का शुभ मुहूर्त

    दुर्गा सप्तशती के अनुसार जो मनुष्य नवरात्रि व्रत की उपासना करता है उसे यश एवं विद्या की प्राप्ति के साथ साथ उत्तम सन्तान एवं ऐश्वर्य प्राप्त करता है। वह सर्वत्र पूजनीय होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है।
    महाशिवरात्रि 2025: भगवान शिव को प्रसन्न करने के 10 सरल उपाय

    महाशिवरात्रि 2025: भगवान शिव को प्रसन्न करने के 10 सरल उपाय

    महाशिवरात्रि, भगवान शिव का सबसे पवित्र पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मा के शिवत्व से मिलन की एक दिव्य रात्रि है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से भरपूर होता है। शिवरात्रि की रात्रि केवल बाह्य रूप से जागरण की नहीं, बल्कि आंतरिक रूप से आत्मजागरण की रात्रि है। यह वह समय है जब हम अपने भीतर बसे शिवतत्त्व को पहचानकर, अपनी चित्तवृत्तियों को शांत कर सकते हैं
    Purnima: पूर्णिमा का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक रहस्य

    Purnima: पूर्णिमा का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक रहस्य और इसका अद्भुत महत्व

    Purnima: पूर्णिमा, या पूर्णिमा का दिन, चंद्र मास की सबसे चमकदार रात होती है। "पूर्णिमा" शब्द संस्कृत के शब्दों "पूर्णोन्नम् (पूर्ण) जिसका अर्थ है पूरा या पूर्ण और "चंद्रमा (चंद्र) जिसका अर्थ है चंद्रमा से उत्पन्न हुआ है। इस दिन, चंद्रमा अपनी पूरी चमक में चमकता है, जो पूर्णता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है। पूर्णिमा, चंद्रमास की सबसे चमकदार रात होती है।
    गणगौर Gangaur

    गणगौर Gangaur – इच्छित वर और उसकी दीर्घायु का त्यौहार

    गणगौर Gangaur - गण (शिव) और गौरी (पार्वती) से मिलकर बना गणगौर। गणगौर Gangaur इच्छित वर और उसकी दीर्घायु का त्यौहार है। गणगौर के रुप में गौरी पूजन एक अनूठा अनुष्ठान है जो कुंवारी और विवाहिताएं समान रूप से मनाती हैं।
    हरियाली अमावस्या

    हरियाली अमावस्या 2024 : धार्मिक महत्त्व

    सनातन धर्म में हरियाली अमावस्या का बहुत महत्व है। हरियाली अमावस्या श्रावण माह के कृष्ण पक्ष में आती है। हरियाली अमावस्या का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना है, हरियाली अमावस्या को विशेष रूप से नवग्रह को अनुकूल करने के महत्व के लिए जाना जाता है। हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व अनेक पुराणों और शास्त्रों में वर्णित है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
    Makar Sankranti: मकर सक्रांति

    Makar Sankranti: मकर सक्रांति का पौराणिक एवं वैज्ञानिक महत्व

    Makar Sankranti: मकर सक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करते है। वर्ष में छः माह सूर्य उत्तरायण और छः माह सूर्य दक्षिणायन होता हैं। अतः इस पर्व को उत्तरायण भी कहते हैं। उत्तर भारत में इसे लोहिडी ,पतंगोंत्सव एवं खिचड़ी पर्व भी कहा जाता हैं। दक्षिण में इस त्यौहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता हैं। भारत के मध्य में इसे मकर सक्रांति या उत्तरायण भी कहा जाता हैं।
    Ganesh Chaturthi

    Ganesh Chaturthi 2024 : गणेश चतुर्थी पर इन उपायों से दूर होंगी सभी...

    Ganesh Chaturthi : सनातन संस्कृति में प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता हैं। हमारे शास्त्रों के अनुसार इसी दिन रिद्धि सिद्धि के दाता, विध्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। प्रत्येक शुभ और मांगलिक कार्यों में सर्वप्रथम गणेश जी को पूजा जाता हैं। गणेश जी को प्रथम पूज्य देव कहा गया है। श्री गणेश जी सुख समृद्धि दाता भी है। इनकी कृपा से परिवार पर आने वाले संकट और विध्न दूर हो जाते हैं। 
    महाशिवरात्रि का रहस्य: क्यों इस दिन शिव की पूजा है विशेष ?

    महाशिवरात्रि का रहस्य: क्यों इस दिन शिव की पूजा है विशेष ?

    महाशिवरात्रि आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण की रात है। यह शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का पर्व है, शिव तत्त्व अनंत, अचल, निर्विकार चेतना का प्रतीक है, और यह रात्रि आत्मसमर्पण द्वारा उस चैतन्य से एकत्व स्थापित करने का अवसर देती है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक दिव्य संयोग है, जिसमें शिव-तत्त्व की ऊर्जा संपूर्ण ब्रह्मांड में प्रकट होती है।
    गुरू पूर्णिमा का महत्त्व

    गुरू पूर्णिमा 2024: गुरु की कृपा से जीवन में सफलता निश्चित

    सनातन संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस पूर्णिमा पर भगवान शिव ने दक्षिणामूर्ति का रूप धारण कर ब्रह्माजी के चार मानस पुत्रों को वेदों का ज्ञान प्रदान किया। इसी दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ।

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