मंत्र – जो मन के भाव से सीधे उत्पन हुए हो। जो स्वयं उत्पन हुआ हो। हमारे शास्त्रों में मंत्रो के चमत्कार का वर्णन है। हमारे वेदों की ऋचाओं के प्रत्येक छंद को मंत्र कहा जाता हैं।शास्त्रों में मंत्र के बारे में कहा गया है कि मन को तारने वाली ध्वनि ही मंत्र है जैसे – श्री , ॐ आदि शब्द होते हुए भी मंत्र है। ये बीज मंत्र है। जो अपने अन्दर बहुत कुछ समेटे हुए हैं। यदि आप बीज मंत्रो का भी जाप करते हैं तो इन मंत्रो का चमत्कार आप स्वयं देख सकते हैं।
मंत्र एक प्रकार की वह शक्ति होती है जिसकी तुलना हम गुरुत्वाकर्षण, चुम्बकीय या विद्युत शक्ति से कर सकते है। मंत्र सिद्ध होने पर साधक को उस देवता या अधि शक्ति की विशेष कृपा मिलती है। प्रत्येक मंत्र की एक निश्चित ऊर्जा , फ्रिक्वेंसी और वेवलेंथ होती है। एक तरह से मंत्र चमत्कारिक शक्ति होती है
मंत्र की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दो – मानस (मन) और त्रं (उपकरण) से बना है। मंत्र वह ध्वनि (वेव) जो अक्षरों एवम् शब्दों के समूहों से बनती है। यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक तारंगात्मक ऊर्जा से व्याप्त है। जिसके दो प्रकार है – शब्द (नाद) और प्रकाश ।
“मननात त्रायते यस्मात्समानमंत्र उदाहत:” अर्थात् जिसके मनन, चिंतन एवम् ध्यान द्वारा संसार के सभी दुखों से रक्षा, मुक्ति एवं परम आनंद प्राप्त होता है, वहीं मंत्र हैं।
“ मन्यते ज्ञायते आत्मादि येन ” अर्थात् जिससे आत्मा और परमात्मा का ज्ञान (साक्षात्कार) हो, वहीं मंत्र है। मंत्र को हम इस प्रकार से समझ सकते हैं कि रोग, शोक, दुख, पाप, ताप एवं भय आदि से रक्षा करे, वही मंत्र है। इनकी शक्ति प्रचण्ड एवम् अमोघ होती है।

मंत्रो के प्रकार
सात्विक मंत्र (वैदिक)
वैदिक मंत्रों को सात्विक मंत्र भी कहा जाता हैं। जो मंत्र वेदों और पुराणों में वर्णित है वह सभी वैदिक मंत्र है। वैदिक मंत्रों को सिद्ध करने में ज्यादा समय लगता हैं। लेकिन इन मंत्रो का असर स्थाई होता है। हम सभी दैनिक जीवन में पूजा पाठ, यज्ञ , व्रत आदि में जो प्रयुक्त करते हैं वे सब वैदिक मंत्र होते हैं।
तांत्रिक मंत्र
तांत्रिक मंत्र तंत्र साधना में प्रयुक्त होते हैं। इसमें मां काली , आदि योगी शिव , भैरव आदि को प्रसन्न करने के लिए साधना की जाती है। यह वैदिक मंत्रों की अपेक्षा जल्दी सिद्ध हो जाते है । और फल भी जल्दी देते हैं । इसका प्रभाव भी जल्दी समाप्त हो जाता हैं । इन मंत्रो का प्रयोग अधिकतर मारण , मोहनी , वशीकरण और शत्रुनाश के लिए ज्यादा किया जाता हैं ।
साबर मंत्र
सर्व प्रथम भगवान शिव ने माता पार्वती को साबर मंत्रो के बारे में बताया था। जिसको बाद में गुरु गोरखनाथ जी इस साबरी विधा को जन कल्याण हेतु इसका विस्तार और प्रसार किया। सनातन संस्कृति में सभी मंत्र संस्कृत भाषा में होते हैं। जिसका सही उच्चारण आम जन के लिए सम्भव नहीं होता।
साबर मंत्र स्थानीय भाषा या हिन्दी में लिखे गए हैं। इसलिए एक आम मानव भी साबर vediमंत्रो का उपयोग अपने जीवन को सफल बनाने में कर सकता हैं। जो व्यक्ति शुद्ध संस्कृत मंत्रो की कृपा प्राप्त नहीं कर सकते वो भी साबर मंत्रो से साधना कर सकते है।
मंत्रो का जाप
मंत्रो का जाप तीन प्रकार से होता है। वाचिक जाप, मानसिक जाप और उपांशु जाप । वाचिक जाप में ऊंचे स्वर में स्पष्ट शब्दों में मंत्र का उच्चारण किया जाता हैं। मानसिक जप में मन से जप किया जाता हैं। उपांशु जप का अर्थ है जिसमें जप करने वाले की जीभ या ओष्ठ हिलते हुए दिखाई देते है। लेकिन आवाज नहीं सुनाई देती है।
मंत्र जप के नियम
मंत्र साधना में विशेष सावधानी बरतनी होती है। मंत्रो का सही उच्चारण करना चाहिए। पवित्रता बनाए रखे। जिस मंत्र का जप अथवा अनुष्ठान करना है उसका संकल्प करे। मंत्र को गुप्त रखना चाहिए। नियमित जप करने से ही मंत्र सिद्ध होता है।
किसी विशिष्ट सिद्धि हेतु कुछ मंत्र दिन को , कुछ मंत्र रात को , कुछ मंत्र विशेष पर्वो पर, कुछ मंत्र सूर्य ग्रहण अथवा चंद्र ग्रहण को तो कुछ मंत्रो को तीर्थ स्थान पर सिद्ध किया जाता हैं। एक बार मंत्र सिद्ध हो जाने से यह चमत्कारी रूप से कार्य करते हैं। मंत्र को सिद्ध करने के लिए पवित्रता और मंत्र के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। मन को एक तंत्र में लाना ही मंत्र होता है।
साबर मंत्र जल्दी सिद्ध होते हैं। तांत्रिक मंत्र में थोड़ा समय लगता हैं। और वैदिक मंत्र में अधिक समय लगता हैं लेकिन उनका प्रभाव स्थाई होता है।
मंत्रो का असर
मंत्र सिद्ध होने पर मंत्र से संबंधित देवी, देवता की विशेष कृपा (अनुदान) प्राप्त होती है। मंत्र से भूत या पिशाच को भी साधा जाता हैं। मंत्र से यक्ष यक्षिणी को भी साधा जाता है। मंत्र जब सिद्ध हो जाता हैं तो सम्बन्धित देवी या देवता की कृपा से कार्य शीघ्र हो जाता हैं।
ऐसे भी कई मंत्र होते हैं जिनमे किसी बांधा को दूर करने की क्षमता होती है। मंत्र साधना भौतिक बांधाओ का अध्यात्मिक उपचार है। यदि आपके जीवन में किसी भी तरह की समस्या या बांधा है तो उसे मंत्रो के माध्यम से हल कर सकते है।
निष्कर्ष (Conclusion)
हमारी सनातन संस्कृति में हमे वैदिक मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए। जिससे हमारी अध्यात्मिक उन्नति हो। जैसे श्री, ॐ, ॐ ग गणपतये नमः , ॐ नमः शिवाय, दुर्गा सप्तशती के मंत्र , आदि हमारे वेदों और धर्मग्रंथों में लाखों मंत्र है। किसी रोग आदि के लिए महामृतुंजय मंत्र , शत्रु नाश हेतु भी अनेक मंत्र है।
मंत्रो को कुछ अज्ञानी लोग अंधविश्वास कह देते हैं लेकिन यह एक उन्नत विज्ञान है। जो हमारे वेदों, पुराणों और उपनिषदों में प्रमाण मौजूद हैं। रामचरित मानस की मंत्र रूपी चौपाईया, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण आदि को प्रयोग कर एक बार देखो तो सही फिर इसका असर देखो।
मंत्रो के बारे में किस मंत्र को कैसे सिद्ध करते हैं। उसका क्या लाभ है। आदि आने वाले लेखों में प्रामाणिक जानकारी दूंगा। आपके अमूल्य सुझाव, क्रिया प्रतिक्रिया स्वागतेय है।







[…] मंत्रो का चमत्कार (Miracle of Mantras) […]
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[…] ‘ मंत्र का समान्य अर्थ है- ‘मननात् त्रायते इति मन्त्रः’। मन को त्राय (पार कराने वाला) मंत्र ही है। मन्त्र योग का सम्बन्ध मन से है, मन को इस प्रकार परिभाषित किया है- मनन इति मनः। जो मनन, चिन्तन करता है वही मन है। मन की चंचलता का निरोध मंत्र के द्वारा करना मंत्र योग है। मंत्र योग के बारे में योगतत्वोपनिषद में वर्णन इस प्रकार है-योग सेवन्ते साधकाधमाः। […]
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