18.8 C
New Delhi
Sunday, January 11, 2026
More
    Ganesh Chaturthi

    Ganesh Chaturthi 2024 : गणेश चतुर्थी पर इन उपायों से दूर होंगी सभी...

    Ganesh Chaturthi : सनातन संस्कृति में प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता हैं। हमारे शास्त्रों के अनुसार इसी दिन रिद्धि सिद्धि के दाता, विध्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। प्रत्येक शुभ और मांगलिक कार्यों में सर्वप्रथम गणेश जी को पूजा जाता हैं। गणेश जी को प्रथम पूज्य देव कहा गया है। श्री गणेश जी सुख समृद्धि दाता भी है। इनकी कृपा से परिवार पर आने वाले संकट और विध्न दूर हो जाते हैं। 
    हरियाली तीज

    हरियाली तीज : मनचाहे वर और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति

    हरियाली तीज : प्रति वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस व्रत को विवाहित महिलाएं और कुंवारी लड़कियां, दोनों करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, हरियाली तीज व्रत को करने से विवाहित महिलाओं का जीवन खुशियों से भर जाता है और पति को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं, कुंवारी लड़कियों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं।
    Amavasya : अमावस्या भी खास है सनातन धर्म में

    Amavasya : अमावस्या भी खास है सनातन में साधना के लिए

    अमावस्या क्यों मानी जाती है सनातन धर्म में साधना, तप, पितृ तर्पण और आत्मशुद्धि के लिए सबसे प्रभावशाली दिन? जानिए अमावस्या का गूढ़ आध्यात्मिक महत्व।
    हरियाली अमावस्या

    हरियाली अमावस्या 2024 : धार्मिक महत्त्व

    सनातन धर्म में हरियाली अमावस्या का बहुत महत्व है। हरियाली अमावस्या श्रावण माह के कृष्ण पक्ष में आती है। हरियाली अमावस्या का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना है, हरियाली अमावस्या को विशेष रूप से नवग्रह को अनुकूल करने के महत्व के लिए जाना जाता है। हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व अनेक पुराणों और शास्त्रों में वर्णित है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
    गणगौर Gangaur

    गणगौर Gangaur – इच्छित वर और उसकी दीर्घायु का त्यौहार

    गणगौर Gangaur - गण (शिव) और गौरी (पार्वती) से मिलकर बना गणगौर। गणगौर Gangaur इच्छित वर और उसकी दीर्घायु का त्यौहार है। गणगौर के रुप में गौरी पूजन एक अनूठा अनुष्ठान है जो कुंवारी और विवाहिताएं समान रूप से मनाती हैं।
    Shardiya (Aashwin) Navratri 2023 Shubh Muhurt

    Shardiya (Aashvin) Navaratri 2023: घट स्थापना, दुर्गाष्टमी, विजिया दशमी का शुभ मुहूर्त

    दुर्गा सप्तशती के अनुसार जो मनुष्य नवरात्रि व्रत की उपासना करता है उसे यश एवं विद्या की प्राप्ति के साथ साथ उत्तम सन्तान एवं ऐश्वर्य प्राप्त करता है। वह सर्वत्र पूजनीय होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है।
    गुरू पूर्णिमा का महत्त्व

    गुरू पूर्णिमा 2024: गुरु की कृपा से जीवन में सफलता निश्चित

    सनातन संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस पूर्णिमा पर भगवान शिव ने दक्षिणामूर्ति का रूप धारण कर ब्रह्माजी के चार मानस पुत्रों को वेदों का ज्ञान प्रदान किया। इसी दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ।
    गणेश चतुर्थी

    गणेश चतुर्थी 2023: महत्त्व, व्रत, पूजन विधि एवं मंत्र

    गणेश चतुर्थी के पर्व का आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्त्व है। भगवान श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता एवम् रिद्धि सिद्धि का दाता कहा जाता हैं।
    Raksha Bandhan 2023

    Raksha Bandhan 2024 : श्रावण पूर्णिमा की तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

    रक्षा सूत्र होता तो एक कच्चा धागा लेकिन बंधन अटूट होता है | सबसे मजबूत और शक्तिशाली होता है | बहने अपने भाई से वचन मांगती है अपनी रक्षा का , जिम्मेदारी का और स्नेह का |
    रक्षा बन्धन त्यौहार

    रक्षा बंधन(Raksha Bandhan) : भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पौराणिक महत्त्व।

    रक्षा बंधन(Raksha Bandhan) : रक्षा बन्धन त्यौहार में रक्षा सूत्र होता तो एक कच्चा धागा लेकिन इसका बंधन सबसे मजबूत होता है। रक्षा बन्धन त्यौहार है भाई बहन का, जिसमें बहन अपने भाई से वचन मांगती है अपनी रक्षा का, अपनी जिम्मेदारी का और स्नेह का। और भाई बहन की मुश्किल घड़ी में साथ देता है। बहन भी रक्षा सूत्र बांधते हुए भाई की रक्षा और जीत की कामना करती हैं। रक्षा बन्धन त्यौहार का पौराणिक महत्त्व है। इसे प्रतिवर्ष श्रावण मास की पुर्णिमा को मनाया जाता हैं।

    Recent posts

    Random Posts